अध्याय 125

अस्पताल के कमरे का दरवाज़ा हल्की-सी आवाज़ के साथ बंद हुआ, और उसी पल एक भारी ख़ामोशी कमरे पर उतर आई।

एलैन दरवाज़े की तरफ पीठ किए अपनी जगह जमी रही—काफ़ी देर तक बिल्कुल न हिली।

उसकी आँखें तेज़ जलन से दुख रही थीं, लेकिन आँसू नहीं आए—बस सूखी-सी, धड़कती हुई टीस।

धीरे-धीरे वह पीठ के बल पलटी, उसकी खाली न...

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